माता मेरी बसुन् धरा,प ता दामोद र,,
दु ्किब स गा.बी. .,ज्य मिरे मेरो घर,,
ज ल्ला पर्र् यो नवलपर ासी, लुम्ब िनी अंचल,,
देव भूमि नेपाल , बुद्ध जन्मस ्थल,,
जन्म हुआ मेरा भारत बर्ष, आसाम परदेश ,,
फैला सकूँ बिश्व भर मे, सान्त िका संदेश ,,
ज्ञा की ज्योत ि जलाने आया, पर्मा त्माक ा दूत हुँ,,
ान्त का प्रति क और,सत यका सबुत हुँ,,
अपनी माँका लाडला हुँ मैं, कुलका मैं सु-पु ्र हुँ,,
ारों का यार हुँ मैं, दुस्म न के लिए तलवार हुँ,,
पत्न का सिन्द ूर हुँ मैं, सोलह सृंगा र हुँ,,
ाथेक विन्द िया हुँ मैं, उसकी गलेका हार हुँ,,
हिमा यकी चोटी हुँ मैं, पर्वत ों सा दिवार हुँ,,
संख् ा में एक हुँ मगर, सैन्य का कतार हुँ,,
अन्य य आत्या चार मिटान े आया, कुदरत का वरदान हुँ,,
अकेल न समझना मुझे, न-जनक प्रधा न हुँ,,
अपनो के लिए मर सकता हुँ, उन्ही ं के लिए जीता हुँ,,
अश्त रोंम ं ब्रह् माश्त ्र और,शा ्त्र ंमें मैं गीता हुँ,,
्ञान ा बुद्ध और,मर यादा ा राम हुँ,,
न्या अत्या चारिय ों पर, दुसरा परशुर ाम हुँ,,
शैर करता आया हुँ मैं,च रासी लाखों योनी,,
शहन करता आया हुँ अशंख् य सुख-द ख, होनी- नहोन ,,
हिम् त है तो लगालो कोई, मेरी शक्ति का अनुमा न,,
इसके समक्ष नग मस्त हैं,प न पुत्र हनुमा न,,
काब्य रचना, प्रवच न श्रवन , आदि में रुची रख्ता हुँ, राष्ट ्र भक्ति , इश्वर ीय भक्ति , मान्य जनों पर आदर सम्मा न मेरा स्वभा व है, इस रचनाम ें मैने अपना ही नही बल्कि उस महान आत्मा का भी वर्णन किया हुआ है, जो दिव्य स्वरू प पर्मा त्माक ा अंश है,
बाल कृष्ण तिवार ी